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आम घटना,उपयोगिता,ए.टी.एम व् लाकर महेश राजा की लघु कथा

ग्रामीण अंचल में एक मासूम के साथ गैंगरेप की घटना हो गयी। हाथरस की घटना के बाद राजनीति गहरा गयी,,,

महासमुंद- जिले के ख्यातिप्राप्त लघुकथाकार महेश राजा की लघु कथाए आम घटना,उपयोगिता,ए.टी.एम व् लाकर सुधि पाठकों के लिए उपलब्ध है ।

आम घटना-एक ग्रामीण अंचल में एक मासूम के साथ गैंगरेप की घटना हो गयी। हाथरस की घटना के बाद राजनीति गहरा गयी थी।सभी अपने अपने बयान देने में जुटे थे। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक सतापक्ष के नेता ने इसे सामान्य घटना बताया।वे। जोश में बोले,हम किशोरावस्था में थे,तब गाँव में यह सब आम होता रहता था।

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एक पत्रकार को बहुत गुस्सा आया,वह कहना चाह रहा था,महोदय फिर तो आपके बहन बेटियों के साथ भी यह सामान्य घटना हुई होगी। पर, वह कह न पाया।उसे चैनल के मालिक का डर था कि मालिक यह सब पसंद नहीं आयेगा।

उपयोगिता

बड़े सबेरे मित्र का फोन आया।कह रहे थे-“आज तिथि बहुत अच्छी पड़ रही है। आपकी भाभी की ईच्छा एक धार्मिक अनुष्ठान कराने की है।घर के ही दस-पंद्रह लोग रहेंगे।आपकी भी जरूरत पड़ेगी।” उन्होंने सहर्ष कहा-“बताईये,मुझे क्या करना होगा।मैं तत्पर हूँ।”

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मित्र ने कहा-“कुछ खास नहीं।बारह बजे तक आना होगा।पूजा वगैरह चलती रहेगी।आपको मेहमानों के साथ रहना होगा।आप अच्छे लेखक है।बातें भी अच्छी करते है ,तो लोगों का मनोरंजन होगा।वे बोरियत महसूस नहीं करेंगे।फिर सब साथ मिल भोजन कर लेंगे।”

ए.टी.एम

रीमा शीला को बता रही थी,-गैस खत्म होने को है।टी.वी.रिचार्ज का पैसा देना है,साथ ही बिजली बिल भी भरना है।कल लास्ट डेट है। आगे फिर बोली-“ये दौरे पर है।सिर्फ दो हजार रूपये देकर गये है।”

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शीला ने पूछा-“अभी ही तो सैलरी मिली है।ए.टी.एम. कार्ड से निकाल ले।” रीमा की आँखे ड़बड़बायी-“कैसा एटीएम कार्ड़। सारा कुछ इन्हीं के पास रहता है।” आगे रूक कर बुदबुदायी,-मैं तो इस घर का ए.टी.एम. बन कर रह गयी हूँ।

लाकर

एक ताजा ताजा बने नेताजी ने घर आकर पत्नी को बताया,आज हमने भी लाकर ले लिया।
पत्नी ने आश्चर्य से पूछा, लाकर…आप क्या करोगे इसका?

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नेताजी मूंँछो मे मुस्कुराये,.-अरी भाग्य वान…मुखौटे रखूंगा, उसमे।आखिर वही तो हमारी पूंँजी है।

सावधानी जरूरी

शासन ने घोषणा कर दी थी कि एक तारीख से सभी शालाओं में अध्यापन कार्य शुरु हो जायेगा। पालक और बच्चें सब खुश थे।कुछ पालक सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। राज समझदार बच्चा था।उसने सारी तैयारियां कर ली थी।साथ ही मास्क और सेनेटाइजर भी रख लिया था। शाला के प्रांगण में सब पुराने दोस्त इकट्ठे हुए।सभी ने एक दूसरे का हाल पूछा और दूरी बनाये रखी। जैसे ही घंटी बजी।सब प्रार्थना स्थल की ओर बढ़े।

मास्क

राज ने देखा बिरजू भैया ने घंटी बजाकर हाथ धोये।परंतु उन्होंने मास्क नहीं पहना था।राज ने अपनी बैग से नया मास्क निकाल कर उन्हें दिया और कहा,भैया सावधानी जरूरी है। दूर से राज की कक्षा शिक्षिका यह दृश्य देख रही थी।उन्होंने मुस्कुराकर फिर हाथ उठा कर राज को आशीर्वाद दिया।

परिचय

महेश राजा
जन्म:26 फरवरी
शिक्षा:बी.एस.सी.एम.ए. साहित्य.एम.ए.मनोविज्ञान
जनसंपर्क अधिकारी, भारतीय संचार लिमिटेड।
1983से पहले कविता,कहानियाँ लिखी।फिर लघुकथा और लघुव्यंग्य पर कार्य।
दो पुस्तकें1/बगुलाभगत एवम2/नमस्कार प्रजातंत्र प्रकाशित।
कागज की नाव,संकलन प्रकाशनाधीन।
दस साझा संकलन में लघुकथाऐं प्रकाशित
रचनाएं गुजराती, छतीसगढ़ी, पंजाबी, अंग्रेजी,मलयालम और मराठी,उडिय़ा में अनुदित।
पचपन लघुकथाऐं रविशंकर विश्व विद्यालय के शोध प्रबंध में शामिल।
कनाडा से वसुधा में निरंतर प्रकाशन।
भारत की हर छोटी,बड़ी पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन और प्रकाशन।
आकाशवाणी रायपुर और दूरदर्शन से प्रसारण।
पता: महेश राजा वसंत /51,कालेज रोड़।महासमुंद।छत्तीसगढ़।
493445
मो.नं.9425201544

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