महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने राज्य सरकार द्वारा कृषि ऋण वितरण प्रणाली में किए गए बदलावों को किसानों के हित के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि ऋण के नगद और खाद अनुपात में परिवर्तन से किसानों की परेशानी बढ़ने वाली है।
नई व्यवस्था के अनुसार अब किसानों को 70 प्रतिशत राशि नगद और केवल 30 प्रतिशत खाद के रूप में दी जाएगी, जबकि पहले यह अनुपात 60 प्रतिशत नगद और 40 प्रतिशत खाद था। इस बदलाव से खाद की उपलब्धता कम होगी और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि पहले सहकारी समितियों से पर्याप्त मात्रा में खाद मिल जाती थी, लेकिन अब सीमा घटने से किसानों को निजी दुकानों और बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ेगा, जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। इससे खेती की लागत में बढ़ोतरी होना तय है।
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चंद्राकर ने यह भी कहा कि इस बार पॉस मशीन के माध्यम से खाद-बीज वितरण अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि अधिकांश समितियों को अभी तक मशीनें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इसके चलते वितरण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। हर वर्ष 1 अप्रैल से खाद-बीज वितरण प्रारंभ हो जाता था, लेकिन इस बार देरी से किसान परेशान हैं।
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उन्होंने बताया कि कई किसानों को नई व्यवस्था की जानकारी नहीं होने के कारण वे तेज गर्मी में बार-बार समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मशीनों की कमी और वितरण में देरी से आगे चलकर भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वर की समस्या भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने कहा कि पहले राशन वितरण में भी पॉस मशीन के कारण समस्याएं सामने आई थीं, और अब खाद-बीज वितरण में भी ऐसी ही परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। इससे किसानों को समय पर खाद-बीज नहीं मिल पाएगा और उन्हें महंगे दाम पर निजी बाजार से खरीदना पड़ेगा।



































