Home क्राइम खैर लकड़ी तस्करी नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार

खैर लकड़ी तस्करी नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार

विवेचना के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी को खंगाला।

खैर लकड़ी तस्करी नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद। खैर लकड़ी तस्करी और फर्जी एनओसी के मामले में महासमुंद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की तकनीकी विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों पर फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने और अवैध कारोबार को कागजी तौर पर वैध दर्शाने में सहयोग करने का आरोप है। दोनों आरोपियों को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

मामला थाना पिथौरा में दर्ज अपराध क्रमांक 172/2026 से जुड़ा है। वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की रिपोर्ट पर 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के अवैध परिवहन के लिए एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना कर उसके वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करने तथा शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाने के आरोप में बीएनएस, आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

खैर लकड़ी तस्करी नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार

विवेचना के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी को खंगाला। जांच में पुलिस के अनुसार आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पिछले दो वर्षों में उड़ीसा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी के अवैध कारोबार के प्रमाण मिले हैं। पुलिस का दावा है कि इस कारोबार को दस्तावेजों में वैध दिखाने के लिए आठ शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कारोबार से जुड़े पैसों के लेनदेन, भुगतान और राशि की लेयरिंग के लिए 10 से अधिक म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने उड़ीसा से फर्जी कंपनियों का संचालन करने और नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो फर्म संचालकों की पहचान की।

इससे पहले 7 सितंबर को पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित मकान की तलाशी लेकर 81 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। पुलिस ने इस रकम को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू की है।

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