खल्लारी। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते नदी-नाले और तालाब जहां पानी से भर गए हैं, वहीं जिले का वृहद कोडार जलाशय भी लबालब हो गया है। जलाशय के बढ़े जलस्तर का सबसे ज्यादा असर डूबान क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसे ग्राम सिंघी (सोरम) के किसानों पर पड़ा है। यहां करीब 30 से 40 एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार जलाशय का पानी खेतों में भर जाने से धान के पौधे गलने लगे हैं। प्रभावित किसानों का कहना है कि डूबे हुए अधिकांश खेत लगानी भूमि के हैं। उनका आरोप है कि जल संसाधन विभाग द्वारा समय पर बांध के गेट नहीं खोले जाने के कारण खेतों में अत्यधिक पानी भर गया और खड़ी फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई।
वर्तमान समय किसानों के लिए बियासी, निदाई और चलाई जैसे कृषि कार्यों का है। ऐसे समय में खेतों में जरूरत से अधिक पानी भरने से फसल को काफी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि फसल पूरी तरह खराब हो गई तो उन्हें दोबारा खेती शुरू करनी पड़ेगी, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। इस वर्ष किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन जलभराव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
कोडार जलाशय लबालब, सिंघी गांव के 40 एकड़ तक धान की फसल डूबी

ग्राम सिंघी के किसानों ने बताया कि गांव का यह पूरा इलाका कोडार बांध के डूबान क्षेत्र के अंतिम छोर में आता है। यहां बड़ी संख्या में किसान रेगहा लेकर खेती करते हैं। ऐसे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती में पैसा लगाया था। अब खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब जाने से उनकी मेहनत के साथ-साथ पूंजी भी डूबने का खतरा है।
प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर वे जल्द ही महासमुंद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा शीघ्र नुकसान का आकलन कर राहत राशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
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