Home देश ‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी में उमड़ा भावनाओं का सागर

‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी में उमड़ा भावनाओं का सागर

इस कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि परिवार में जहां मां का स्नेह अमूल्य है, वहीं पिता का त्याग, अनुशासन और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी में उमड़ा भावनाओं का सागर

उदयपुर। नवीन फाउंडेशन द्वारा स्वर्गीय प्रभुदास मोगरी की पुण्य स्मृति में काव्य गोष्ठी “पिता एक फरिश्ता” (सत्र द्वितीय) का भव्य एवं भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम दयावंती मोगरी के स्नेहिल सानिध्य में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजन की संयोजक अर्चना चावला रहीं, जिन्होंने अपने पिता की स्मृति में इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार आशा पाण्डेय ओझा, रश्मि शर्मा, संजय गुप्ता ‘देवेश’ एवं रेखा शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पिता के जीवन में महत्व को रेखांकित करते हुए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

काव्य गोष्ठी का मुख्य आकर्षण काव्य पाठ रहा, जिसमें 27 कवि एवं कवित्रियों ने भाग लिया। अमित व्यास, डॉ. प्रियंका भट्ट, सुमन स्वामी, गरिमा खण्डेलवाल, अनीता भाणावत, डॉ. कामिनी व्यास रावल, पल्लवी कुमारी, स्वाति शकुंत, संगीता गुजराती, हरित जोशी, दक्षेश पानेरी, डॉ. शीतल श्रीमाली, डॉ. नीलम रमेजा, डॉ. निर्मला, डॉ. मनीष सक्सेना, मीनाक्षी पंवार, दीपा पंत, दीपिका स्वर्णकार, शाद उदयपुरी, श्याम मठपाल सहित अनेक रचनाकारों ने पिता पर आधारित अपनी भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कीं।

‘पिता एक फरिश्ता’ काव्य गोष्ठी में उमड़ा भावनाओं का सागर

कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विह्वल कर दिया। किसी ने पिता के मौन त्याग को शब्द दिए, तो किसी ने उनके संघर्ष, स्नेह और संरक्षण को कविता में जीवंत किया। हर रचना में पिता के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता झलकती रही। सभी रचनाकारों ने अपने-अपने पिता की स्मृतियों को साझा करते हुए स्वर्गीय प्रभुदास मोगरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

लगभग तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि परिवार में जहां मां का स्नेह अमूल्य है, वहीं पिता का त्याग, अनुशासन और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को ऊपरना ओढ़ाकर स्मृति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समापन अत्यंत आत्मीय एवं भावनात्मक वातावरण में हुआ, जिसने उपस्थित सभी जनों के हृदय में पिता के प्रति गहरी संवेदनाएं और सम्मान जागृत कर दिया।

यह काव्य गोष्ठी केवल एक साहित्यिक आयोजन न होकर, भावनाओं, स्मृतियों और रिश्तों की गहराई को समझने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी। नवीन फाउंडेशन का यह प्रयास समाज में पारिवारिक मूल्यों और संवेदनाओं को जीवित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सराहा जा रहा है।

कार्यक्रम की सफलता ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे और अधिक साहित्यिक आयोजनों की अपेक्षा की जा रही है, जहां रिश्तों की संवेदनाओं को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त किया जा सके।

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