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शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा अब बढ़ी कीमतों और नई दुकानों से जनता को कर रही परेशान : विनोद चंद्राकर

भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। जो पार्टी पहले पूर्ण शराबबंदी की मांग कर रही थी, वही अब नई दुकानों के जरिए शराब बिक्री को बढ़ावा दे रही है;-विनोद

शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा अब बढ़ी कीमतों और नई दुकानों से जनता को कर रही परेशान : विनोद चंद्राकर
Vinod Chandrakar-1

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी विपक्ष में रहते शराब को “जहर” बताकर पूर्ण शराबबंदी की मांग करती थी, वही सत्ता में आने के बाद शराब को “अमृत” मानकर उसकी बिक्री बढ़ाने में जुट गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने शराब के दाम बढ़ाकर आम जनता से अतिरिक्त वसूली शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने विपक्षी कार्यकाल के दौरान पूरे पांच वर्षों तक प्रदेश में शराबबंदी को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किए, लेकिन सरकार बनने के बाद सबसे पहले नई शराब नीति लागू कर राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया। इसी के तहत पूरे प्रदेश में नई शराब दुकानों को अनुमति दी गई। महासमुंद जिले में ही पिछले दो वर्षों में 10 नई शराब दुकानें खोली गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक शराब की पहुंच बढ़ गई है।

शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा अब बढ़ी कीमतों और नई दुकानों से जनता को कर रही परेशान : विनोद चंद्राकर

श्री चंद्राकर ने आरोप लगाया कि पहले सरकार ने शराब के दाम कम कर लोगों को इसकी लत लगाने का काम किया और अब प्रति बोतल 20 से 100 रुपये तक कीमत बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। साथ ही, शराब को प्लास्टिक की बोतलों में बेचने के फैसले को भी उन्होंने जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। उनका कहना है कि इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

विनोद चंद्राकर ने कहा कि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवा, किशोर और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शराब की गिरफ्त में आ चुके हैं, जिससे अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। जो पार्टी पहले पूर्ण शराबबंदी की मांग कर रही थी, वही अब नई दुकानों के जरिए शराब बिक्री को बढ़ावा दे रही है।

अंत में उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तो फिर प्रदेश के विकास और रोजगार के लिए धन की कमी क्यों बताई जा रही है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि क्या इस कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी लागू की जाएगी।

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