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काम की लगन में शादी के लग्न के लिए उम्र कब बीता उसे पता ही नहीं चला…

नारायणपुर-काम की इस लगन में उसके लग्न (शादी) ही उम्र कब बीत कई उसे पता ही नहीं चला… जी हां में बात कर रहा हूं….नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर के बखरूपारा आंगनबाड़ी की उस कार्यकर्ता की जिसका नाम अनिता ठाकुर है। जिसने 18 वर्ष की उम्र से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में नारायणपुर से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर घनघोर ग्राम ईरकभट्टी में नौकरी का दामन थामा। इसके बाद वह कोडोली, मसपुर, आकाबेड़ा, ओरछा आदि जगह रहकर उसने हास्टल वार्डन, मितानिन प्रेरक, डिपो होल्डर, दवाई वितरण आदि काम भी किए है।

अनिता बताती है कि काम से फुर्रसत नहीं मिली तो शादी का ख्याल ही नहीं आया। अब बच्चो के बीच रहकर उनको लाड़ दुलार कर लेती हूं। उनकी तोतली बोली और मधुर मुस्कान ही अब मेरी जिन्दगी का हिस्सा है। आजकल वह नारायणपुर के बखरूपारा आंगनबाड़ी केन्द्र में आज भी दो दशक पुरानी अपनी मोपेड पर सूखा राशन और रेडी-टू-ईट लोगों के चौखट-चौखट जाकर एक मां की तरह लोगों तक पहुंचा रही है।

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पूरी दुनिया में कोरोना और लॉकडाउन के कारण सब कुछ ठहरसा गया है। लेकिन नारायणपुर में इन जैसी हजारों कार्यकर्ताओं की लगन पर सब कुछ ठीक-ठाक है। अनिता ठाकुर लोगों को कोरोना के बचाव के तरीके और सोशल डिस्टेंसिंग के बारें में बताकर जागरूक करने का काम भी कर रही है। ऐसी हजारों कार्यकर्ताओं के दम पर नारायणपुर में कुपोषण में कमी आयी है।

मुख्यमंत्री भूपेष बघेल ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जज्बे को समझा और अपनी पाती में उनकी तारीफ की। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बहिनी को लिखी चिठ्ठी में कोरोना बीमार के रोकथाम और उनके और सरकार के हाथ मजबूत करने की एक मिशाल पेश करने के लिए आभार व्यक्त किया। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की अच्छी परिवरिश और उनके पोष्टिक आहार और व्यवहारिक ज्ञान की बातें आंगनबाड़ी से ही तो शुरू होती है।

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