बलौदाबाजार:प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा गृह  सुब्रत साहू ने आज यहां जिले में नरवा, गरूवा, घुरूवा एवं बाड़ी योजना का मौके पर अमल देखने के लिए टीला (पलारी) खर्वे एवं बगार (कसडोल) का दौरा किया। उन्हेांने टीला एवं खर्वे में गौठान का निरीक्षण कर यहां के गतिविधियों की जानकारी ली। बगार में नरवा घटक के अंतर्गत प्रस्तावित संरचनाओं एवं इनकी उपयोगिता के बारे में ग्रामीणों से चर्चा किया। उन्होंने टीला में नगद संगवारियो से मुलाकात कर उनके काम-काज की जानकारी ली और अपने सामने कुछ पेशनधारी महिलाओं कों पेशन राशि का भुगतान कराया। कलेक्टर  कार्तिकेया गोयल, एसपी नीतु कमल एवं जिला पंचायत के सीईओ  आशुतोष पाण्डेय भी उपस्थित थे.

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उन्होंने नगद संगवारी की जिले की अभिनव पहल की सराहना की और अन्य जिलों में भी इसे विस्तारित करने की मंशा जताई।प्रमुख सचिव साहू ने पलारी विकासखण्ड के ग्राम टीला से दौरे की शुरूआत की। उन्होंने गौठान में गौठान समिति के सदस्यों, चरवाहों एवं महिला समूहों के साथ गौठान की उपयोगिता के बारे में विचार-विमर्श किया। साहू को महिला समूह की सदस्यों ने गौठान के एक किनारे में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट दिखाया और इसके निर्माण की प्रक्रिया बताई। समूह की अध्यक्ष गुरूबारी बाई ने बताया कि विगत एक माह से उनके द्वारा वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण शुरू किया गया है। गौठान के गोबर को एकत्र कर वे इसमें केचुआं खाद में परिवर्तित करते हैं। कृषि विभाग द्वारा उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि एक महीने बाद उन्हें आमदनी शुरू हो जायेगी.

सरकार के कृषि, उद्यान एवं वन विभाग को बेचने के साथ ही खुले बाजार में इसका विक्रय करेंगे। उन्होंने गौठान में ही बिहान समूह की महिलाओं से मुलाकात की। उनके द्वारा गाय की गोबर से अगरबत्ती, धूप, छेना, एवं दीप का निर्माण किया जा रहा है। पड़ोस के नंदिनी आर्गेनिक्स द्वारा उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने प्रमुख सचिव को बताया कि खुले बाजार में भी मांग आने लगी है। उन्होंने गौठान में पशुओं के टीकारण एवं अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए उपयोगी सुझाव भी दिये.

प्रमुख सचिव साहू ने खर्वे में संचालित गौठान का भी अवलोकन किया और इनके काम-काज की सराहना की। गांव की परम्परागत गौठान को नये स्वरूप में विकसित किया गया है। बिहान समूह की की अध्यक्ष  भारती यादव ने बताया कि कम्पोस्ट खाद का निर्माण शुरू कर दिया है। वे गौठान के गोबर के साथ ही अपने घर से भी गोबर ले आती हैं। उन्होंने बताया कि महानदी में तरबूज उगाने वाले किसानों को वे कम्पोस्ट बेचेंगी। उनसे खाद बेचने का समझौता हो गया है। खर्वे में लगभग 700 मवेशी हैं, जिनमें से आधे गौठान में आती हैं.

प्रमुख सचिव ने और ज्यादा समय तक गौठान में गायों को रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अभी खेतों में पैरा पड़ा हुआ है। गांव के लोग जनसहयोग से खेतों से पैरा लाकर गौठान में संग्रहित करें और यहां पशुओं को खिलायें। उन्होंने बगार गांव से होकर बहने वाली बेंगवा नाले का भी अवलोकन किया। नरवा घटक के अंतर्गत जल संग्रहण एवं संरक्षण के लिए इसका चयन किया गया है। उन्होंने आगे काम बढ़ाने के पहले भू-संरचना का अध्ययन कर लेने के निर्देश दिये। उन्होंने मौके पर मौजूद ग्रामीण  संतूराम पैकरा, मोहरसिंह, कैलाश पैंकरा आदि से चर्चा करते हुए नाले एवं बांध की कहानी जानी। उन्होने बताया कि नाले में आज से 50 साल पहले दस महीने तक पानी रहता था.

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