महासमुंद:जिले में बढ़ते आत्महत्या के प्रकरण देखते हुये जिला प्रशासन ने नवजीवन अभियान के रूप में उठाये हैं ठोस कदम। प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप मनाया जाता है। इस बार लोगों में दोहरी जागरूकता लाने के उद्देश्य से आत्महत्या रोकथाम की थीम पर जोर दिया गया। कलेक्टर सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में आज जिला पंचायत सभा कक्ष में सवेरे 10.30 बजे से दोपहर 02 बजे तक विस्तारपूर्वक चर्चा की गई. कलेक्टर जैन ने कहा कि उन्हें अखबारों के माध्यम से ऐसी सुर्खियां दिखतीं जो आत्महत्याओं की खबरों में तथाकथित सामाजिक विकास की विडम्बनापूर्ण एवं त्रासद तस्वीर को बयां करती थी। जिससे उन्हें आत्महत्या रोकथाम की दिशा में पहल के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नवजीवन अभियान के उद्देश्य व महत्ता पर प्रकाश डालते हुये अब तक प्राप्त सफलता परिणाम और सुधार हेतु अंकेक्षण (ऑडिट) जैसे मुद्दों पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये.

इसमें स्व-स्फूर्त हो जनहित में आत्महत्या निवारक सेवा का भाव भी निहित था। इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मो. जहाँगीर तिगाला ने विधिक जानकारी प्रदान किया। उन्होंने सोशल मीडिया के चलते अन-सोशल होते समाज को प्राकृतिक-नैसर्गिक अभ्यास से जोड़ने पर जोर दिया। ऐसे समाज के निर्माण की ओर ध्यान इंगित किया, जहाँ हर कोई बिना झिझके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुल कर बात कर सके। साथ ही साथ माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित शिविरों में भी पैरा लीगल वॉलेंटियर के माध्य्म से निःशुल्क विधिक सेवा प्राप्त करने की अपील की.

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसपी वारे ने स्वस्थ सामाजिक माहौल आपस में बातचीत संपर्क एवं पारिवारिक मेल-जोल की महत्ता पर विचार रखे। डॉ वारे के मुताबिक अगर खुदकुशी का विचार आये तो बेहतर है कि किसी करीबी से परेशानी साझा कर लें। तनाव पीड़ित व्यक्ति के लिये आपके बोल ही संजीवनी बूटी का काम कर जाते हैं। कठिन दौर में हेल्पलाइन नंबर, पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक की राय भी बहुत कारगर साबित होती है। अंतिम चरण में जिला कार्यक्रम प्रबंधक व नवजीवन के नोडल अधिकारी संदीप ताम्रकार ने बताया कि मानसिक रूप से परेशान लोगों को सलाह और इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक संचालित है.

जिसमें 10 जून से अब तक कुल 845 लोगों ने लाभ लिया है। वहीं ग्राम-पंचायतों में भी 569 नवजीवन केंद्र बनाये जा चुके हैं। जहाँ उपलब्ध साधनों से तनाव प्रबंधन करना भी मनःस्थिति संतुलित करने का एक बेहतरीन तरीका है। इस दौरान बैठक में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अफसर डॉ छत्रपाल चन्द्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल.कुर्रे, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर बोंदले, जिला सलाहकार  अदीबा बट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता व सलाहकार असीम श्रीवास्तव एवं अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में नवजीवन सखा-सखी व प्रेरक उपस्थित रहे। सभी ने तनाव प्रबंधन व स्वस्थ जीवन कौशल शैली अपना कर आत्महत्याएं रोकने का संदेश प्रेषित किया.

पहुंच अब विश्व स्वास्थ्य संगठन तक
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यकम के नोडल अधिकारी डॉ छत्रपाल चन्द्राकर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महासमुंद की ओर बहुत ही अच्छा व प्रेरक संदेश प्रेषित किया है कि वे आत्महत्या रोकथाम अभियान नवजीवन के तहत जमीनी स्तर हुये कार्य व प्रणाली की बारीकियां सीखने आयेंगे। आगामी चरण में इसमें जिनेवा सहित अन्य बड़े व नामी देशों के विद्वान रिसर्च के लिये भी इच्छुक नजर आ रहे हैं।सखी ने बचाई बच्चे की जान और सखा ने दूर किये पीड़ित के दुख

केस-1
सुलेखा शर्मा जो पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने शिवानंद कॉलोनी में एक बच्चे को नवजीवन के तहत मार्गदर्शन दिया। जो इतना दिग्भ्रमित था कि हमेशा नकारात्मक विचारों के साथ मरने की बातें करता था। लेकिन, आज वह खुद को मजबूत कर आगे बढ़ने की बातें करने लगा है.

केस- 2
पेशे से शिक्षक हरिराम साहू जिनकी पदस्थापना उच्च प्राथ.शाला बोरियाझर में है। वे बच्चों सहित किशोरों और बुजुर्गों को तनाव प्रबंधन व नशा उन्मूलन से जोड़ कर आत्महत्या रोकथाम हेतु प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने प्रेरक की भूमिका में अपने अनुभव बांटते हुये नवजीवन की सफलता के कई उदाहरण प्रस्तुत किये.

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