इधर गोबर हैं। थोड़ा देख के चलो। उधर गोबर है थोड़ा बच के चलो। तुम्हारें दिमाग में तो गोबर भरा है। कुछ ऐस शब्दों और वाक्यों के साथ अक्सर कुछ लोग गाय की गोबर का इस तरह तौहीन उड़ाते है जैसे यह बहुत गंदी हो। पर यह गोबर कितना कीमती हो सकता है, कितना उपयोगी हो सकता है, यह बात तो शायद इस प्रदेश के मुख्यमंत्री को और गाँव में रहने वाली महिलाओं को मालूम है। तभी तो, कल तक सिर्फ कण्डे और खाद बनाने के लिए काम आने वाला यह गोबर अब इतना महत्व का हो गया है कि इससे बने उत्पादों का आर्डर देश की राजधानी दिल्ली से मिलने लगा है.

यहा के गोठानों से निकलने वाले गोबर से तैयार पूजन सामग्री और उत्पाद की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। दिल्ली जैसे महानगर में जहां दीपावली त्यौहार के समय चाइनीज दीये,मोमबत्ती व झालर का बोलबाला रहता है ऐसे में पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिये उपयोगी छत्तीसगढ़ के गोबर से बने बायो दीये प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्लीवासियों के लिये एक राहत जैसा है। ईकोफ्रेण्डली होने के साथ-साथ लक्ष्मी पूजन,दीवाली में गाय के गोबर का खास महत्व होता है। इन्हीं खास महत्व की वजह से ही गाय के गोबर से बने दीये की मांग दिल्ली और नागपुर से आई है। पहला आर्डर दो लाख दीये का है। जिसे स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा है.

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