Home छत्तीसगढ़ वनोपज खरीदी कार्य का नए साल से किया जाएगा बहिष्कार-यशवंत चंद्राकार

वनोपज खरीदी कार्य का नए साल से किया जाएगा बहिष्कार-यशवंत चंद्राकार

नियमितीकरण का भरोसा, निकला चुनावी जुमला The confidence of regularization turned out to be an election rhetoric

वनोपज खरीदी कार्य का नए साल से किया जाएगा बहिष्कार-यशवंत चंद्राकार

महासमुंद।36गढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबन्धक संघ के जिला अध्यक्ष प्रबंधक संघ महासमुंद यशवंत चंद्राकार ने कहा है कि नए साल से वनोपज खरीदी कार्य का बहिष्कार किया जाएगा । विभाग में 34 वर्षो से नियमितीकरण की आश देख रहे लघुवनोपज प्रबंधक को सरकार ने जनघोषणा पत्र नियमितीकरण का भरोसा दिलाया था इसके अलावा 6 वर्षों से वेतन में एक रुपये की भी नही हुई वही वृद्धि सेवा नियम लगाया, किंतु आज तक नही किया अमल किया गया है इन सभी मांगो को लेकर संघ के द्वारा उक्त निर्यण लिया गया है। इसकी सूचना प्रबंध संचालक महासमुंद को दे दी गयी है ।

ज्ञात हो कि 36गढ़ लघुवनोपजो के संग्रहण में पूरे देश मे नंबर एक है। कोई भी राज्य हमारे आस-पास नही है। जिसका सबसे बड़ा कारण लघुवनोपज संघ के 901 प्रबंधक हैं। जिनकी महेनत के कारण ही प्रदेश आज इन बुलंदियों पर पहुँच सका है। लघुवनोपजो के संग्रहण में प्रदेश सरकार को वर्ष 2020-21 में कुल 13 राष्ट्रीय अवार्ड भी मिले। फिर भी सरकार एवं अधिकारियों द्वारा विगत 34 वर्षो से प्रबंधको का सिर्फ शोषण ही किया जा रहा है और छला जा रहा है।

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वन मंत्री मोहम्मद अकबर के नेतृत्व में गठित समिति के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय द्वारा आपत्ति कर वापस कर देना भी हास्यास्पद है प्रबंधकों के वेतन में 6 वर्षो से एक भी रुपये की वृद्धि नही, 5 वर्ष पहले सेवा नियम बनाया गया, पर आज तक लागू नहीं, वेतन बढ़ाने राज्य संचालक मंडल ने प्रस्ताव बनाया उसे तक लागू नही किया गया। इसके चलते प्रदेश के समस्त प्रबंधकों ने 01 01 2022 से लघुवनोपजो के संग्रहण के बहिष्कार का निर्णय किया है।

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प्रबंधको द्वारा सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना अंतर्गत पूर्व में 52 लघु वनोपजों का स्वसहायता समूहों के माध्यम से संग्रहण किया जा रहा था। इस वर्ष सरकार ने और तीन वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। जिसमे कोदो 3000.00, कुटकी 3000.00 एवं रागी 3377.00 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित किया गया है। इन तीनो वनोपजों को न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना में शामिल करने से कृषकों एवं संग्राहकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। किंतु प्रबंधको द्वारा वनोपज खरीदी के बहिष्कार से निश्चित तौर पर ख़रीदी पर सीधे असर पड़ेगा।

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