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दसलक्षण महोत्सव मे तप को किया गया परिभाषित

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Sikar:-बजाज रोड स्थित दिगंबर जैन नया मंदिर में दसलक्षण महोत्सव के सातवे दिवस 6 सितंबर को उत्तम तप दिवस पर आचार्य विद्यासागर Vidhyasagr जी महाराज की सुशिष्याएं ब्रह्मचारिणी उषा Usha दीदी,ज्योति Jyoti दीदी के सानिध्य में प्रातः कालीन अभिषेक शांति धारा एवं ध्यान किया शांति धारा करने का सौभाग्य कमल कुमार गंगवाल सुरेरा वाले परिवार को मिला।

तप को किया गया परिभाषित

तप,धर्म पर विशेष चर्चा करते हुए ब्रह्मचारिणी उषा दीदी ज्योति दीदी ने तप को परिभाषित करते हुए कहा की – कर्मक्षयार्थ तप्यते इति तपः अर्थात कर्म के क्षय के लिए जो तपा जाता है,उसे तप कहते है।तप के बिना कर्मों कि निर्जरा नहीं होती, जीवन में तप ज़रूरी है।अतिरिक्त इच्छाओं का दमन करना ही तप है पाषाण से अतिरिक्त करने से मानवता प्रगट हो जाती है पाषाण में सोना है दूध में धृत है तिल में तेल उसी प्रकार शरीर में परमात्मा है।

दसलक्षण महोत्सव मे तप को किया गया परिभाषित

तप तीन प्रकार के होते हैं शारीरिक तप मानसिक तप वाचनिक तप प्रतिकूल प्रसंगों को समता से सहन करना तपस्या है मन में समता नहीं कितना भी व्रत,उपवास,अध्ययन कर लो यह सब व्यर्थ हो जाती है। दोपहर में जैन धर्म के ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया साथ ही संध्याकालीन जैन सोश्यल ग्रुप सीकर द्वारा एक सामाजिक नाट्य रुपांतरण पिघलते रिश्ते का प्रस्तुतिकरण किया गया मंगलाचरण भक्ति नृत्य धार्मिक प्रश्न मंच का भी आयोजन किया गया । कार्यक्रम में अनिल वन्दना जैन दीप प्रज्ज्वलन किया और राजेंद्र कुमार अंजना देवी योगेश राधिका बाकलीवाल पुरस्कार प्रायोजक थे।

कल उत्तम त्याग दिवस

दसलक्षण महोत्सव मे 7 सितंबर बुधवार को सीकर के जैन मंदिरों में उत्तम त्याग दिवस मनाया जाएगा । पंडित जयंत शास्त्री  ने उत्तम त्याग के बारे में बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन का मुख्य आधार है और साथ ही संध्याकालीन सामायिक के पश्चात नया मंदिर महिला मंडल द्वारा शिक्षाप्रद नाटिका संस्कारित बेटियां का मंचन भक्ति नृत्य आयोजित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सीकर में ग्यारह जैन मंदिर है।

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