दिल्ली-डीजीजीआई के अधिकारियों ने खुफिया तौर पर पता लगाया कि कुछ निर्यातक कंपनियां गैर-मौजूदा और फर्जी फर्मों या ऐसी फर्मों, जिन्होंने स्वयं किसी भी किस्म की खरीदारी नहीं की है, के चालानों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाने में लगी हुई हैं। इस प्रकार प्राप्त किए गए आईटीसी का निर्यात वस्तुओं पर आईजीएसटी का भुगतान करने में उपयोग किया गया था, जिसका बाद में नकद वापसी (कैश रिफंड) के रूप में दावा किया गया था।
इस प्रकार सरकारी खजाने को दोहरा नुकसान पहुंचाया जा रहा था यानी एक तरफ बिना निर्यात की गई वस्तुओं पर आईटीसी लिया गया और दूसरी ओर ऐसे धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से आईटीसी भी नकद वापसी के रूप में प्राप्त की। इस प्रकार प्राप्त की गई आईजीएसटी की नकद वापसी राशि लगभग 61 करोड़ रुपये है।
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डीजीजीआई मुख्यालय ने इन निर्यातक कंपनियों और इनके मालिक के निवास स्थानों के साथ-साथ विभिन्न आपूर्तिकर्ता कंपनियों पर 06.03.2020 को छापे मारे। यह पाया गया कि इन आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने माल की आपूर्ति किए बिना ही इन निर्यातकों को केवल बिलप्रदान कर दिए थे। निर्यातकों ने इन फर्जी बिलों पर आईटीसी ले लिया था और माल का निर्यात दिखाया कर उस पर रिफंड भी ले लिया था।
इन निर्यातक फर्मों के नियंत्रकों को डीजीजीआई ने 06.03.2020 को गिरफ्तार किया था। हालाँकि सप्लाई करने वाली फर्मों का लुधियाना में रहने वाला मालिक भगौड़ा था और उसे पकड़ा नहीं जा सका था। अनेक समन देने के बावजूद वह जांच के लिए भी हाजिर नहीं हो रहा था। आपूर्ति करने वाली फर्मों का यह मालिक आदतन आर्थिक अपराधी लगता हैऔर उसके तथा उसकी कंपनियों के खिलाफ अनेक मामले दर्ज हैं। इससे पहले भी उसे डीजीआरआई द्वारा जांच-पड़ताल के बाद एक वाणिज्यिक धोखाधड़ी के मामले में को फेपोसा के तहत निवारक नजरबंदी में रखा गया था।
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एक विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हुई थी कि उक्त व्यक्ति शिमला के एक प्रसिद्ध फाइव स्टार होटल में छिपा हुआ है। अधिकारियों का एक दल शिमला भेजा गया, जिसने इसे उस होटल से 07.10.2020 की सुबह गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया जिसने इसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में भेज दिया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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