Home छत्तीसगढ़ 10 करोड़ की रीजेंट खरीदी पर निष्पक्ष जांच की मांग की पूर्व...

10 करोड़ की रीजेंट खरीदी पर निष्पक्ष जांच की मांग की पूर्व संसदीय सचिव चंद्राकर ने

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं निजीकरण और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रही हैं:-विनोद चंद्राकर

10 करोड़ की रीजेंट खरीदी पर निष्पक्ष जांच की मांग की विनोद चंद्राकर ने
Vinod Chandrakar-1

महासमुंद। 10 करोड़ की रीजेंट खरीदी पर विनोद चंद्राकर ने हमला करते हुए स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने की है । प्रदेश सरकार पर स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए गंभीर वित्तीय गड़बड़ी बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर सवाल खड़ा करता है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि करोड़ों रुपये की रीजेंट खरीदी केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 21 जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सरकारी पैथोलॉजी लैब का संचालन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सौंपने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद महज दो दिन बाद 23 जनवरी को सीजीएमएससी द्वारा एक निजी कंपनी को 10 करोड़ रुपये के रीजेंट की आपूर्ति का आदेश जारी किया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार को पहले से जानकारी थी कि सरकारी लैब बंद होने वाली हैं और मौजूदा मशीनों का उपयोग समाप्त हो जाएगा, तब उन्हीं मशीनों के लिए इतनी बड़ी मात्रा में रीजेंट खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार इस निर्णय का लाभ किसे पहुंचाने का प्रयास किया गया, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

पूर्व विधायक ने कहा कि प्रत्येक पैथोलॉजी मशीन के लिए अलग प्रकार के रीजेंट की आवश्यकता होती है। यदि एचएएल नई मशीनें स्थापित करेगी तो पुराने उपकरणों के लिए खरीदा गया रीजेंट उपयोग में नहीं आएगा और उसके अनुपयोगी होकर एक्सपायर होने की आशंका रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की स्थिति बनाई गई है।

10 करोड़ की रीजेंट खरीदी पर निष्पक्ष जांच की मांग की विनोद चंद्राकर ने

श्री चंद्राकर ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था में एचएएल के सबसे महंगे मॉडल को मंजूरी दी गई है, जिसमें मरीजों को जांच शुल्क में किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि जांच सरकारी भवन, सरकारी बिजली और सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से होगी, लेकिन शुल्क आम नागरिकों से लिया जाएगा, जिससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं निजीकरण और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रही हैं। उनके अनुसार पहले सरकारी प्रयोगशालाओं का संचालन निजी हाथों में सौंपा गया और अब अनुपयोगी होने वाले रीजेंट की खरीदी कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

पूर्व संसदीय सचिव ने मांग की कि 10 करोड़ रुपये की रीजेंट खरीदी की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए, खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए तथा यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जाए।

  1. हमसे  जुड़े :-
     आपके लिए /छत्तीसगढ़
    watsApp https:FLvSyB0oXmBFwtfzuJl5gU
    Twitter:https:DNS11502659
    Facebook https:dailynewsservices/