बार नवापारा/पिथौरा-वन्यप्राणी चीतल के शिकार मामले में एक आरोपी को और गिरफ्तार किया गया है।आरोपी के पास से जप्त किया गया मोबाइल से हुई बातों को ट्रेस किया जा रहा है।ताकि इस प्रकरण में संलिप्त फरार अन्य आरोपियों को भी शिकंजे में लिया जा सके।इस घटना के बाद बार नवापारा अभ्यारण्य अधीक्षक आर.एस. मिश्रा एवं परिक्षेत्र अधिकारी कृषाणु चन्द्राकर के मार्ग दर्शन पर बार नवापारा अभ्यारण्य में कार्यरत वन अमलों को जंगल एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए  विशेष दिशा-निर्देश बैठकों के माध्यम से दिया जा रहा है।आगन्तुक पर्यटकों के आने-जाने की समय-तिथि के अलावा जांच भी किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि बार नवापारा अभ्यारण्य विकास खण्ड कसडोल के अन्तर्गत ग्राम रामपुर कक्ष क्रमांक 163 हरदी बीट में शिकारियों द्वारा तीन चीतल को बन्दूक की गोली मार दिया गया था।उसके पश्चात दो चीतल को कार में डाले जाने के बाद तीसरे नर चीतल को लाने घटना स्थल जंगल के अंदर आरोपी गए हुए थे।इसी दरम्यान देवपुर वन परिक्षेत्र के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी एवं वन रक्षक गश्त कर लौट रहे थे।तब बार नवापारा-पकरीद मार्ग पर संदिग्ध अवस्था में दिनांक 7-8 दिसम्बर की मध्यरात्रि सेन्ट्रो कार क्रमांक सीजी 06 जीपी 8910 को देखे जाने के पश्चात वाहन चालक से पुछताछ करते हुए वाहन की चेकिंग की गई।कार की डिक्की में खून से लथपथ दो बोरी भरी हुई दिखाई दी।
मौके पर उपस्थित सहायक परिक्षेत्र अधिकारी को शिकार से जुडा़ मामला प्रतीत होते ही इसकी सूचना बार नवापारा में पदस्थ अधीक्षक आर.एस. मिश्रा को दी गई।चूंकि घटना स्थल बार नवापारा वन मुख्यालय से महज चार से पांच किमी. की दूरी पर ही स्थित है।स्टाफ को वहां पहुंचते समय नही लगा और त्वरित कार्यवाही करते हुए कार सहित आरोपी कार चालक नरेन्द्र पटेल को दो मृत चीतल जो बोरी में भरा हुआ था रंगे हाथ पकड़ कर मुख्यालय लाया गया।अधीक्षक के मार्ग-दर्शन पर अन्य भगोड़े आरोपियों को पकड़ने मध्यरात्रि को ही टीम बनाई गई और जंगल के चारों दिशा में सर्च किया गया।तब सुबह होते-होते एक संदिग्ध को पकड़ा गया।पुछताछ करने पर अपना नाम इम्तियाज ग्राम सिनोधा महासमुंद होना बताया गया तथा उक्त अपराध में कडा़ई से पुछताछ के बाद शिकार प्रकरण में शामिल होना कबुल किया।
जिसे गिरफ्तार कर आज सोमवार को भाटापारा न्यायालय में पेश किए जाने की बात अधीक्षक एवं परिक्षेत्र अधिकारी ने कही है।वन अधिकारी द्वय मिश्रा एवं चन्द्राकर ने पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि जप्त वाहन को राजसात की कार्रवाई की जा रही है।अभ्यारण्य क्षेत्र के सभी जांच नाकों में आने-जाने वाले गाडि़यों की सघन चेकिंग की जा रही है।शिकार प्रकरण में जिन लोगों के भी संलिप्तता है तथा जिन लोगों ने भी बेरहमी से निरिह वन्यप्राणी को बन्दूक की गोलियों से घायल कर गला रेत कर मारा है।उन्हें बक्शा नही जाएगा।जप्त किए गए मोबाइल से किस-किस से बात हुई है इसे ट्रेश कर आरोपियों का पता लगाया जाएगा।तथा वे चीतल के मांस को कहां-कहां खपाते इस पर भी विवेचना की जा रही है।
इसके अतिरिक्त सवालों के जवाब में अधिकारियों ने कहा कि साल भर के अंदर शिकार की कोई भी घटना घटित नही हुई है।जबकि देवपुर परिक्षेत्र में अन्य तरीकों से शिकार किए जाने पर आरोपियों को जेल निरुद्ध किया गया है।उन्होंने कहा कि घटना को देखते हुए पकडे़ गए आरोपी पेशेवर होना प्रतीत होता है।फरार आरोपी जावेद फारूकी वन विकास निगम में क्षेत्र रक्षक के पद पर पदस्थ था।जो शिकार की घटना के पश्चात से फरार है।इसकी सूचना बार नवापारा अभ्यारण्य कार्यालय से मंडल कार्यालय को प्रेषित की गई थी कि जावेद फारूकी चीतल के शिकार में संलिप्त है।जिसे मंडल प्रबंधक बार नवापारा परियोजना मंडल द्वारा निलंबित किए जाने का आदेश क्रमांक 82 दिनांक 8/12/19 जारी किया गया है।निवास पर अनुउपस्थित पाये जाने पर उक्त पत्र चस्पा करने आदेशित किया गया था।
इसके लिए वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी आज सोमवार को बार नवापारा पहुंच कर उक्ताशय की जानकारी अधीक्षक एवं परिक्षेत्र अधिकारी बार नवापारा अभ्यारण्य को भी दी।अभ्यारण्य क्षेत्र जंगल के भीतर लकडी़ कटाई, तेन्दूपत्ता तोडा़ई,महुआ-लासा संग्रहण पर भी वनवासियों को प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।ऐसी स्थिति में मुख्यालय से महज चार से पांच किमी. की दूरी पर वन्यप्राणियों का शिकार की घटना घटित हो जाती है और वह भी मध्य रात्रि के समय जबकि सूर्यास्त के बाद चार चक्का या उससे बडी़ वाहनों का प्रवेश अभ्यारण्य क्षेत्र में प्रतिबंधित है।फिर भी वाहन का प्रवेश होता है शिकार होता है गाडी़ में लोड किया जाता है तब कही जाकर धोखे से विभाग वालों को पता चलता है और कार्रवाई की जाती है।यदि इन्हें भनक नही लगती तो चोर रास्ते से यह शिकारी भागने में कामयाब हो जाते है.
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