Home छत्तीसगढ़ शानदार आतिशबाजी के साथ विजयदशमी का पर्व मनाया गया

शानदार आतिशबाजी के साथ विजयदशमी का पर्व मनाया गया

35 फीट रावण का पुतला दहन किया गया। इस मौके पर शानदार आतिशबाजी की गई

महासमुंद। नया रावणभाठा दशहरा मैदान में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ विजयदशमी शक्ति का पर्व मनाया गया। असत्य पर सत्य की जीत पर 35 फीट रावण का पुतला दहन किया गया। इस मौके पर शानदार आतिशबाजी की गई।

नगर पालिका परिषद एवं दशहरा उत्सव समिति द्वारा प्रति वर्ष के भांति इस वर्ष भी वार्ड क्रमांक 30 के दशहरा मैदान में विजयदशमी पर्व धुमधाम से मनाया गया। इस दौरान दिशा नाटय कला मंच के कलाकारों द्वारा रामलीला मंचन के पहले संसदीय सचिव  विनोद सेवनलाल चंद्राकार, नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकार, पूर्व विधायक डॉ विमल चोपड़ा सहित तमाम जनप्रतिनिधियों ने प्रभु श्रीराम जी का माल्यार्पण किया। पश्चात रावण वध रामलीला का मंचन किया गया।

रामलीला का संक्षिप्त मंचन के साथ सादगी पूर्ण ढंग से मनाया गया विजयादशमी पर्व

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कलाकारों के मनमोहक रामलीलाल का नाटय प्रस्तुति देख दर्शकों ने भुरी-भुरी प्रशांसा की। बाद प्रभु श्रीराम, क्ष्मण, माता सीता के साथ रावण का वध किया। असत्य पर सत्य की जीत के लिए आतिशबाजी की गई। कोविड-19 के गाइडलाइन के तहत दशहरा मैदान में आयोजित विजयदशमी के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा मास्क एवं सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी। वहीं रामलीला, रावण दहन देखने दशहरा मैदान आने वाले लोगों का नाम और मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज किया गया। इस अवसर पर सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, नागरिकगण उपस्थित थे।

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बता दें कि, इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है।

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शानदार आतिशबाजी के साथ विजयदशमी का पर्व मनाया गया

दशहरा (विजयदशमी )भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए, अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

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