अजित पुंज-बागबाहरा-पाँचों राज्य में जनता ने स्पष्ट बहुमत देकर हिन्दुस्तान के राजनेताओ को एक अच्छा सँकेत दिया है कि, देश में विधायकों की खरीद बिक्री कर सत्ता हासिल करना देश हित और जनहित में नहीं है । देश मे हरियाणा के भजनलाल के समय से प्रारंभ दल बदल कर सत्तारूढ़ होना,आगे चलकर छत्तीसगढ़ जैसे शाँत प्रदेश में भी 13 विधायकों को पद पैसा से प्रभावित कर दलबदल करवाना प्रायः हर उस राज्य में चालू हो गया है जहाँ स्पष्ट बहुमत नहीं है । स्पष्ट बहुमत नही होने वाले राज्यों में हमेशा असिथरता की स्थिति बनी रहती है ।
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बहुमत नहीं मिलने पर करोड़ों रुपये का ,तथा पद का आफर विधायकों को देना खासकर निर्दलीय और छोटे दलों के विधायक को आये दिन समाचारों की सुर्खियों में बना रहता है बहुमत के अभाव में मुख्यमंत्री सबसे ज्यादा ध्यान प्रदेश के विकास के बजाय सेँटिग मे आये विधायको को देता है जो उसका पद मे बने रहने के लिए मजबूरी है ।इससे प्रदेश के समग्र विकास नहीं हो पाता । सन 1960 के दशक में हिन्दुस्तान मे होनेवाली सैद्वांतिक विचारधारा की राजनीति करने का सँकेत देने वाले पाँचों राज्य की जनता धन्यवाद के पात्र हैं।
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