महासमुंद:-जिले के प्रसिद्ध लघु कथाकार महेश राजा की लघु कथाए- जिम्मेदारी,साँसों का गणित,परिवार का हिस्सा,कालोनी का मकान व् तरीका सुधि पाठकों के लिए उपलब्ध है ।
जिम्मेदारी –आज निजी कारणों से रीमा का मूड आफ था।एम.ए. प्रथम वर्ष में घनानंद पढाते समय देखा कि दूसरी पंक्ति में बैठा अनिल लैक्चर को ध्यान से न सुन.रहा था।वह ऊँध रहा था।रीमा ने उसे खडे होने को कहा तो वह बदतमीजी के साथ मुँह बना कर क्लास से निकल गया।रीमा को बुरा लगा।
रेस्ट टाइम में पीयून से कह कर अनिल को अपने रूम में बुलाया। इजाजत लेकर अनिल आया।उसका मुँह उतरा हुआ था।वह माफी मांग रहा था। रीमा ने पूछा,कुछ खाया है,सुबह से। उसने ना कही। रीमा ने अपने टिफिन से परांठे-सब्जी निकाल कर खाने को दिया।
वह चुपचाप खाने लगा। हाथ-मुंह धोकर आया तो रीमा ने पूछा-क्या बात है? अनिल फफक कर रो पडा,घर के हालात ठीक नहीं।पिता अपाहिज, माँ बीमार।घर पर कुँआरी बहन। वह कह उठा,पाल नहीं सकते तो पैदा क्यों किया?

रीमा सब समझ गयी। आश्वासन भरे लहजे में कहा,बेटा तुम देश के भावी नागरिक हो,और हम शिक्षकों की जिम्मेदारी है,तुम्हें स्वस्थ मानसिकता प्रदान करे।हर माह मुझसे एक हजार रूपये ले जाना।तुम्हारी पढाई का सारा खर्च मैं उठाती हूँ।यह बात किसी से मत कहना।
अनिल हाथ जोड़ते खडा हो गया।रीमा के पैरों में गिर गया। रीमा ने कँधों पर हाथ रख कर उठाया,कहा,वादा करै ,तुम पूरा ध्यान पढाई में लगाओगे और कुछ बन कर परिवार और विद्यालय का नाम रोशन करोगे। रीमा का मन शांत हो गया था। सिर से एक बोझ उतर गया था।
साँसों का गणित
सुबह वे बगीचे पहुंच गये।शुद्ध हवा बह रही थी।कुछ देर भ्रमण किया फिर योगा।एक खाली बैंच पर आकर बैठ गये। अचानक बैचेनी महसूस हुयी।साँस अटकने लगी। वे जल्दी-जल्दी बाहर आये। सिगरेट निकाल कर सुलगायी। पहले ही कश के बाद वे सामान्य महसूस करने लगे।
परिवार का हिस्सा
इस शहर में हाल ही में तबादला हुआ था। वे गेस्टहाउस में ठहरे हुए थे।रहने के लिये जगह की तलाश थी। दोनों शाम को एक अच्छी लोकेलिटी पर फ्लैट देख रहाथा।साथ में उसका प्यारा पप्पी शैडो था। युवती का उससे बडा लगाव था। एक सुंदर जगह दिखी।सारी बातें तय हो गयी।नियम कानून की बातें भी सेट हो गयी।अचानक बुजुर्ग मकान मालिक ने पूछा,यह डाँगी आप लोगों के साथ रहेगा।
उन्होंने हामी भरी।मकान मालिक ने एतराज किया।युवती ने समझाया काफी अच्छी नस्ल का प्यारा पपी है।किसी को तंग नहीं करेगा। पर बात आकर अटक गयी।वे बाहर निकल गये।शैडो युवती की गोद में ही था।घर के एक सदस्य की तरह। उन्होंने तय किया कि अगली जगह पहले वे शैडो के साथ रहने की बात करेंगे।
कालोनी का मकान
शहर में उसका टा्ंसफर हो गया था।पत्नी और एक बच्चा। विभागीय मकान छोटा था,पर कुछ पैसे बच जाये,यह सोचकर वे रहने लगे थे। पास ही पुलिस थाना था।अपराधी के साथ मारपीट और गाली-गलौच आम बात थी। कुछ दिनों बाद उसने महसूस किया पत्नी कुछ चिड़चिड़ी हो गयी है।सोचा थकान या काम की अधिकता से हुआ होगा।
एक दिन आफिस से लौट रहे थे।बेटा पडोसी के बच्चे को लडाई के दौरान गंदी गाली दे रहा था। वे चौंक उठे।समझाकर बच्चे को घर लाये। दूसरे दिन से ही उन्होंने शहर में मकान की तलाश शुरू कर दी और ओव्हर टाइम भी करने लगे।
तरीका
नये अफसर के आगमन से विभाग में तहलका मच गया था।अफसर सिद्धांत वादी और नियम के पक्के थे।न खाते थे न ही किसी को खाने देते थे। कर्मचारी की उपरी आमदनी ठप्प होने से उनका जीना हराम हो गया। गुपचुप मीटिंग हुयी।तय हुआ यूनियन लीडर से अफसर को भिडा दिया जाये। दूसरे सप्ताह अफसर के तबादले का आदेश आ गया।
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