महासमुंद।सरकार की त्रुटिपूर्ण और किसान विरोधी नीतियों के चलते जिले के करीब 12 हजार पंजीकृत किसान इस वर्ष भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान विक्रय से वंचित रह गए। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने बताया कि इससे पहले खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में भी जिले के लगभग 9 हजार किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाए थे।
चंद्राकर ने कहा कि यह स्थिति राज्य सरकार की किसान विरोधी सोच का प्रत्यक्ष परिणाम है। शासन ने जानबूझकर धान खरीदी की प्रक्रिया देरी से शुरू की और सहकारी समिति कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर पूरे नवंबर माह खरीदी व्यवस्था को प्रभावित रखा। महासमुंद जिले में बड़ी संख्या में लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिनकी फसल 1 नवंबर तक कटकर तैयार हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि किसानों को खेती के लिए ऋण लेना पड़ता है और उसकी अदायगी की समय-सीमा भी निर्धारित होती है। समय पर धान बिक्री नहीं हो पाने के कारण किसानों को मजबूरी में कोचियों को औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ा। अधिकांश छोटे किसान इसलिए समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच सके क्योंकि न तो उन्हें समय पर टोकन मिला और न ही एग्रीस्टैक पोर्टल पर उनका पंजीयन पूरा हो सका।
महासमुंद जिला के 12 हजार किसान समर्थन मूल्य से वंचित – विनोद चंद्राकर
पूर्व संसदीय सचिव ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुनियोजित तरीके से धान खरीदी में अवरोध पैदा किया। वर्तमान में जिले की लगभग सभी समितियों में धान बफर लिमिट से अधिक हो चुका है, भंडारण के लिए जगह नहीं बची है और उठाव न होने के कारण जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने महज दो खरीदी सीजन में ही किसानों को गंभीर संकट में डाल दिया है।
चंद्राकर के अनुसार महासमुंद जिले में 1 लाख 60 हजार 118 पंजीकृत किसानों से 12 लाख 45 हजार मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन शासन की नीतियों और खरीदी प्रक्रिया में जानबूझकर पैदा की गई बाधाओं के चलते केवल 1 लाख 48 हजार किसानों से लगभग 10 लाख 187 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका। परिणामस्वरूप जिले के 12 हजार किसान और करीब 2 लाख 45 हजार मीट्रिक टन धान खरीदी से बाहर रह गया।
उन्होंने कहा कि यह तो केवल महासमुंद जिले की तस्वीर है, पूरे प्रदेश में भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण लगभग ढाई लाख किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित हो गए हैं।
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