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36गढ़ मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों को एम्स रायपुर के डॉक्टरों से मिलेगा सहयोग

यह परियोजना को पीएचसी पाटन, साजा, रतनपुर, धमतरी और एम्स रायपुर पांच केंद्रों से पायलट मोड में शुरू होगा

दिल्ली-केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री, पुरुषोत्तम रूपाला ने आज केंद्रीय क्षेत्र के फ्लैगशिप कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत, मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के माध्यम से एम्स रायपुर द्वारा संचालित होने वाली टेलीमेडिसिन सेवाओं के लिए एक पायलट परियोजना की शुरूआत की। छत्तीसगढ़ मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य अब एम्स रायपुर के डॉक्टरों से अपनी चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।

केन्द्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने पायलट परियोजना की शुरूआत करने के लिए डॉ. नितिन एम. नागरकर, निदेशक और सीईओ, एम्स, रायपुर को 50 लाख रुपये का चेक सौंपते हुए कहा कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि छत्तीसगढ़ मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों को जब कभी चिकित्सा की आवश्यकता होगी, वे टेलीमेडिसिन सुविधा के माध्यम से अपने दूरस्थ इलाकों से ही एम्स, रायपुर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क कर सकेंगे।

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केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि हमारे देश में टेलीहेल्थ सेवाओं के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं अर्बन शहरों में बहुत ही ज्यादा केंद्रित हैं, जबकि गांवों और तटीय क्षेत्रों जैसे दूरदराज इलाकों के लोग ऐसे लाभों से अभी भी वंचित हैं। उन्होंने कहा कि महामारी से प्रभावित दुनिया में, टेलीहेल्थ सहित प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाएं पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक बन चुकी हैं। मत्स्यपालन और मत्स्यपालन सहकारी समितियों से संबंधित लोगों को गुणवत्तापूर्ण मध्यवर्ती परामर्श सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने में सहायता करेगा।

एम्स, रायपुर द्वारा स्टार्टअप क्रियाकलाप के रूप में अगले तीन वर्षों के लिए प्रस्तावित इस परियोजना को पीएचसी पाटन (दुर्ग जिला), पीएचसी साजा (बेमेतरा), पीएचसी रतनपुर (बिलासपुर), पीएचसी धमतरी (धमतरी) और एम्स रायपुर (रायपुर) नामक पांच केंद्रों से पायलट मोड में शुरू किया जा रहा है। यह केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार, एनसीडीसी और एम्स रायपुर का एक संयुक्त प्रयास है।बाद में, इस परियोजना के अंतर्गत और भी जिलों को शामिल किया जाएगा।

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एमडी, एनसीडीसी संदीप नायक ने बताया कि सुविधाओं की शुरूआत करने के साथ ही सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में अपनी-अपनी सहकारी समितियों से जुड़े मछुआरा और महिला मछुआरा समुदाय के बीच स्वास्थ्य असमानताओं की खाई को भरना है।

टेलीमेडिसिन सुविधा की शुरूआत करने का निर्णय इस बात को जानने के बाद लिया गया कि सहकारी समितियों के कई सदस्य दूरस्थ इलाकों में रहने, गरीबी या कोविड के डर के कारण चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाने से बच रहे थे। दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का पदार्पण होने से मत्स्य समुदाय के बीच स्वास्थ्य जागरूकता भी उत्पन्न होगी।” उन्होंने बताया कि परामर्श के बाद अगर यह लगा कि रोगी को और ज्यादा विशेष उपचार की आवश्यकता है तो एम्बुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध होगी।

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