महासमुंद। स्वामी आत्मानंद स्कूलों की सुविधाओं और संसाधनों में लगातार कमी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रारंभ की गई स्वामी आत्मानंद विद्यालय योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को निजी स्कूलों जैसी उच्च स्तरीय, आधुनिक अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा नि:शुल्क उपलब्ध कराना था। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्य करने का आरोप लगाते हुए कहा है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के बच्चों को समान अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी गई थी। इसी का परिणाम था कि प्रदेशभर में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के विद्यार्थियों ने टॉप-10 में स्थान अर्जित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है और पिछले दो वर्षों में इन स्कूलों की स्थिति प्रभावित हुई है।
आत्मानंद स्कूलों की सुविधाओं में कटौती का आरोप लगाया पूर्व संसदीय सचिव ने
उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन विद्यालयों को पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं हो रही है। कुर्सी, टेबल, प्रयोगशाला सामग्री और विद्यार्थियों की ड्रेस जैसी बुनियादी आवश्यकताएं भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। पूर्व में प्रति स्कूल 5 से 6 लाख रुपए तक का फंड जारी होता था, जिसे घटाकर अब 2 लाख रुपए से भी कम कर दिया गया है। उन्होंने इसे सरकार की नकारात्मक सोच का परिणाम बताया और कहा कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर स्कूलों के ढांचे को कमजोर किया जा रहा है।
पूर्व संसदीय सचिव ने यह भी कहा कि सरकार बनने के बाद तत्कालीन मंत्री एवं वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की गई थी, लेकिन वह अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी। उनके अनुसार न तो शिक्षकों की नियुक्ति हुई और न ही स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया, बल्कि पहले से व्यवस्थित व्यवस्था को प्रभावित किया गया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा स्तर में गिरावट का उदाहरण वर्ष 2024-25 का शिक्षण सत्र है, जिसमें महासमुंद जिले से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में कोई भी छात्र टॉप-10 में स्थान नहीं बना सका, जबकि 2023-24 सत्र में बेहतर संसाधनों के कारण जिले के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।
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