डॉ आरती विज पीआरओ दिल्ली एम्स ने बताया कि एम्स ने धोखाधड़ी को एसबीआई के संज्ञान (Cognizance)में लाया और आर्थिक अपराध शाखा EOW,दिल्ली पुलिस को भी सूचित कर दिया गया है. कुछ घटनाओं (Events)को ऐसे समय में रोका गया जब भुगतान से (By payment)पहले जाँचों को सत्यापित (Verified)करने के लिए SBI अधिकारियों ने AIIMS अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं से संपर्क किया गया है.साइबर ठगी की इस सनसनीखेज वारदात (Sensational incident)को अंजाम चेक-क्लोनिंग के जरिए दिया गया है.

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डॉ आरती विज का कहना है कि एम्स ने कुछ मामलों का पता(Address of cases) लगाया, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं ने 12.44 करोड़ रुपये के कुछ क्लोन / फर्जी चेक से भुगतान किया था। साइबर ठगी (Cyber fraud)की इस सनसनीखेज वारदात(Sensational incident) को अंजाम चेक-क्लोनिंग के जरिए दिया गया है। एम्स निदेशक वाले खाते से करीब सात करोड़ रुपये और डीन वाले खाते से करीब पांच करोड़ रुपये की रकम निकाले (Withdraw money)जाने की बात सामने आ रही है।”

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