गरीबों की चिंताओं पर पीएम का खास जोर लॉक़डाउन के दौरान

प्रधानमंत्री ने आज अपने संबोधन में ये स्पष्ट किया की ग़रीब वर्ग,दिहाड़ी मज़दूर वंचित वर्ग की मुश्किलें आसां करना सरकार की प्राथमिकता है,आइए देखते हैं की इन वर्गों की मुश्किलें आसान करने के लिए केंद्र सरकार क्या क्या कदम उठा रही है

समाज के निर्धनतम व्यक्ति को लॉकडाउन में राहत पहुंचाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता रही है । यही वजह है कि लॉकडाउन शुरु होने के साथ ही सरकार ने इस वर्ग को मदद पहुंचाने के लिए एक के बाद एक कई एलान किए । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज ,प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नए योजना ,उज्ज्वला सिलेंडर योजना , पीएम-किसान योजना और जन धन खाता धारकों को नकद मदद जैसे तमाम कार्यक्रमों और कदमों के जरिए सरकार इस वर्ग को लगातार लाभ पहुंचा रही ताकि लॉक़डाउन में उनको कम से कम दिक्कत हो ।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेजः

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 मार्च 2020 को 1.70 लाख करोड़ रुपये के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज  की घोषणा की थी । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के एक हिस्से के रूप में सरकार ने महिलाओं और गरीब वरिष्ठ नागरिकों एवं किसानों को मुफ्त में अनाज देने और नकद भुगतान करने की घोषणा की।  पैकेज के तहत 13 अप्रैल, 2020 तक 32.32 करोड़ लाभार्थियों को  डीबीटी के माध्यम से सीधे तौर पर 29,352 करोड़ रुपये की नकद सहायता दी गई है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजनाः

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नन योजना के तहत 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अप्रैल के लिए निर्धारित 40 लाख मीट्रिक टन में से अब तक 20.11 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उठा लिया है । योजना के तहत 5.29 करोड़ लाभार्थियों को 2.65 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का मुफ्त राशन वितरित किया गया  । 3985 मीट्रिक टन दलहन भी विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाः 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के के तहत लाभार्थियों को 97.8 लाख मुफ्त उज्ज्वला सिलेंडर वितरित किए गए है ।  योजना के तहत अब तक कुल 1.39 करोड़ सिलेंडर बुक किए जा चुके हैं  ।

पीएम-किसान सम्मान निधिः

इस वित्तीय  साल की पीएम-किसान की पहली किस्त: 14,946 करोड़ रुपये कुल 7.47 करोड़ किसानों को उनके खाते में दी गयी है ।

जन धन खातों के जरिए मददः 

मोदी सरकार ने गरीबों के जनधन खाते खुलवाए थे अब उन्हीं खातों के जरिए लोगों को नकद मदद दी जा रही है । 19.86 करोड़ महिला जन धन खाता धारकों को सरकार ने  कुल 9930 करोड़ रुपये दिए हैं । यही नहीं लगभग 2.82 करोड़ वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगगजनों को1400 करोड़ रुपये  दिए गए  हैं । 2.17 करोड़ भवन और निर्माण श्रमिकों को 3071 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली है ।

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ईपीएफओ से निकासीः

ईपीएफओ के 2.1 लाख सदस्यों ने अब तक 510 करोड़ रुपये की ऑनलाइन निकासी की है। बकाया राशि का 75% गैर-वापसी योग्यअ अग्रिम या 3 माह का वेतन, इनमें से जो भी कम हो, लेने की अनुमति ईपीएफओ के सदस्यों को है । 100 कामगारों तक के प्रतिष्ठानों में प्रति माह 15000 रुपये से कम वेतन प्राप्त करने वाले ईपीएफओ सदस्यों के योगदान के रूप में वेतन के 24% का भुगतान।अप्रैल, 2020 हेतु इस योजना के लिए ईपीएफओ को 1000 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है।

मनरेगाः

मनरेगा के तहत बढ़ी हुई मजदूरी दर को अधिसूचित कर दिया गया है जो 01 अप्रैल 2020 से प्रभावी है  मजदूरी और सामग्री दोनों के लंबित बकाये को समाप्त करने के लिए राज्यों को 7100 करोड़ रुपये जारी किए गए।

बीमा योजनाः

सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बीमा योजना शुरु की गयी है ।  योजना का संचालन न्यू इंडिया एश्योरेंस द्वारा किया गया है जिसमें 22.12 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को कवर किया गया है।

कुल मिलाकर इन सब योजनाओं के जरिए सरकार की कोशिश है कि लॉकडाउन से गरीब लोग  प्रभावित न हों । सरकार लगातार ये  सुनिश्चित कर रही है कि  समाज के कमजोर वर्गों को बुनियादी सुविधाएं निरंतर मिलती रहें।

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