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बंदियों ने बनाया ‘आउट ऑफ द बॉक्स‘ बैंड पार्टी,उदयपुर में है इसकी अच्छी मांग

राज्य सरकार के प्रयासों से बदल रही है जेलों की सूरत,जेल में कैदी सीख रहे हैं संगीत, समारोह में देते हैं लाइव परफॉर्मेंस

जयपुर- उदयपुर जेल प्रशासन द्वारा राजकीय कार्यक्रमों के अलावा जिला न्यायालय और बार एसोसिएशन के कार्यक्रमों के लिए भी जेल बैंड को भेजा जाता है। क्योंकि जेल बैंड की उदयपुर में अच्छी मांग है। निर्धारित दरों पर बुकिंग के बाद बंदियों को बाहर भेजा जाता है।बुकिंग जो पैसा मिलता है, उसका कुछ हिस्सा बैंड में शामिल बंदियों में बांट दिया जाता है और बाकी को राज्य सरकार के बंदी कल्याण कोष में जमा करवाया जाता है। एनजीओ के माध्यम से बंदियों को गायकी के अलावा म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके अलावा बंदियों ने ‘आउट ऑफ द बॉक्स‘ नाम से अपना एक म्यूजिक बैंड भी बनाया है। आठ सदस्यों वाले इस म्यूजिक बैंड के लीड सिंगर जरनैल सिंह और परमेश्वर व्यास हैं। इस बैंड में गिटारिस्ट रवि दूदानी, चैनसुख की-बोर्ड प्लेयर, बालकृष्ण, ड्रमर संजय, पप्पू, और सुनील शामिल हैं।

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खास बात यह है कि म्यूजिक बैंड अपने गाने खुद कम्पोज करता है। लीड सिंगर जरनैल सिंह ने बताया कि वो जेल से रिहा होने के बाद गायकी को ही अपने पेशे के रूप में अपनाना चाहेगा। वहीं, परमेश्वर व्यास जेल से रिहाई के बाद म्यूजिक बैंड बनाकर ऎसे प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को मंच प्रदान करना चाहते हैं, जो संसाधनों के अभाव में अपना हुनर सामने नहीं ला पाते।

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यही ही नही अब उदयपुर केंद्रीय जेल को उदयपुर सुधारगृह का नाम दिया गया है के परिसर में कदम रखते ही दीवारों पर लिखे प्रेरक वाक्य, अनमोल वचन, गीता सार एक अलग ही दुनिया का अहसास करवाते हैं। जेल के बारे में आम धारणा यही है कि वहां पर बड़ा भयानक माहौल होता होगा, लेकिन उदयपुर केंद्रीय सुधारगृह की दीवारें किसी आर्ट गैलरी का अहसास करवाती हैं।

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जेल प्रशासन के सहयोग से वहां एक कैदी साधुराम ने जेल की दीवारों को थ्री-डी पेंटिंग्स से गुलजार कर दिया है।

अपराध और अपराधियों की नकारात्मकता के बीच रंगों भरी दुनिया एक नई उम्मीद जगाती है।

मुख्य द्वार से लेकर धर्मस्थलों, जेल की दीवारों और कमरों में साधुराम की कारीगरी देखी जा सकती है।

पेंटिंग बनाने के लिए आवश्यक कलर,

पेंट व अन्य सामग्री जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है।

जेलर चंदन सिंह ने बताया कि हम चाहते हैं कि जेल में आकर व्यक्ति को

अपनी गलती का अहसास हो और वह प्रायश्चित कर सकें तथा जेल के बाहर आने

पर एक नई जिंदगी शुरू करे। यही वजह है कि

अब केंद्रीय कारागृह भी केंद्रीय सुधारगृह के नाम से जाने जाते हैं।

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