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मिशन 100 दिन के तहत देशभर के विद्यालयों व् आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल आपूर्ति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राज्यों से 100 दिनों के इस अभियान का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने का आह्वान किया ताकि सभी सार्वजनिक संस्थानों में पाइप से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके

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फ़ाइल् फोटो

दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत ने 100 दिनों के अंदर संपूर्ण भारत के विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पाइप से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान का आज शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने इस मिशन मिशन की कल्पना 29 सितंबर, 2020 को की थी, जब वह जल जीवन मिशन हेतु ग्राम पंचायतों और पानी समितियों के लिए मार्गदर्शिका जारी कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा था कि 2 अक्टूबर, 2020 को 100 दिन का एक अभियान आरंभ किया जाएगा, जिसके अंतर्गत देशभर के विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में 100 दिनों के भीतर पाइप से सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने राज्यों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि इन सार्वजनिक संस्थानों में पाइप से पेयजल आपूर्ति करने के इस मिशन का इस अभियान का बेहतर से बेहतर लाभ लिया जाना चाहिए।

बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि बच्चे ही जल जनित बीमारियों के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। इसीलिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों इत्यादि में नल से जल उपलब्ध कराने के प्रावधान किए गए हैं।

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राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अंतर्गत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अभियान के दौरान यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि ग्राम सभाओं को अगले 100 दिनों के भीतर स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक प्रस्ताव जल्द से जल्द पास करने के लिए कहा जाए।

जल जीवन मिशन का लक्ष्य बहुत बड़ा है और इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण घर को 2024 तक नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें भी प्राथमिकता सूची में बच्चे सबसे ऊपर हैं क्योंकि डायरिया, डिसेंट्री, कोलरा और टाइफाइड इत्यादि जल जनित बीमारियों का सबसे पहला शिकार बच्चे ही होते हैं।

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बच्चों में प्रगति के वर्षों में असुरक्षित और अशुद्ध पानी के लगातार सेवन के कारण बीमारियों का संक्रमण कई बार हो सकता है, जो बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। स्थितियां उन क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर हैं जहां पर उपलब्ध जल स्रोतों में आर्सेनिक, फ्लोराइड, भारी धातुओं इत्यादि की मात्रा अधिक है।

जहां पानी में ऐसे तत्व अधिक हों, वहां पर जल जनित बीमारियों के बार-बार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इस मिशन में उपर्युक्त सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाने की क्षमता है इसलिए सभी ग्राम पंचायतों और इनकी उप-समितियों को मिशन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और इसे सफल बनाना चाहिए ताकि जनता को, विशेषकर जो सबसे ज़्यादा खतरे में है, उन्हें पारंपरिक समस्या से छुटकारा मिल सके।

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