महासमुंद- इस बार होली को लेकर बिहान समूह से जुड़े महिलाओं के द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। स्व सहायता समूह की स्वरोजगार से जुड़ी महिलाएं दिन-रात हर्बल गुलाल तैयार करने में लगी है। इस गुलाल को लगाने से जहां चेहरे पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। महिला स्वयं सहायता समूह के जरिए में तैयार किए जा इन हर्बल गुलाल और हर्बल रंग की कई विशेषताएं हैं।
इसमें फूलों के रंग का इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं गुलाल और रंग में महक के लिए भी फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसमें किसी भी तरह का केमिकल नहीं मिलाया जाता है, जो नुकसान करे। यही वजह है कि इस गुलाल और रंग की डिमांड ज़िले सहित आसपास के ज़िलो में से भी आ रही है। वहीं, महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।
महासमुन्द विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बिरकोनी के माया महिला स्व सहायता समूह द्वारा इस बार की होली के लिए जड़ी, बुटी व फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही है। संस्था से जुड़ी 10 ग्रामीण महिलाओं के द्वारा होली के लिए हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। समूह की इन्द्राणी कश्यप ने बताया कि सिर्फ़ एक दिवसीय प्रशिक्षण पाकर महिलाओं के द्वारा प्राकृतिक साग-भाजी, टेसू फूल आदि से हाथों से इस हर्बल गुलाल को तैयार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया है कि इस गुलाल का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। महिलाएं घर बैठे इस अबीर को तैयार कर रही है ताकि उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ स्वरोजगार भी घर पर मिल रहा है।
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माया समूह की महिलाओं ने बताया कि अभी हाल फ़िलहाल पीला, संतरा, लाल एवं चंदन रंग के गुलाल का निर्माण किया जा रहा है । जिसका विक्रय स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गौठान परिसर बिरकोनी के दुकान के माध्यम से किया जा रहा है। जल्दी ही आसपास के जंगलो-में जाकर टेसू फूल चुनकर उनका भी हर्बल गुलाल बनाया जाएगा।
इंद्राणी ने बताया कि हर्बल गुलाल का आर्डर स्व-सहायता समूह के मोबाईल नम्बर 93400-00982 में काॅल करके भी ले सकते है। हर्बल गुलाल बनाने में हल्दी, ईत्र, पलास का फूल एवं खाने का चुना आदि का उपयोग किया गया है। 100 ग्राम हर्बल गुलाल की क़ीमत मात्र 10 रुपए है । वर्तमान में समूह द्वारा 06 किलोग्राम गुलाल निर्मित किया जा चुका है और हर्बल गुलाल बनाने का कार्य किया जा रहा है। समूह की महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण गत 25 फरवरी को बिरकोनी के गौठान में कृषि महाविद्यालय कांपा के प्रशिक्षकों के द्वारा दिया गया है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत डॉ. रवि मित्तल ने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाओं को उनकी अभिरुचि और स्थानीय बाज़ार माँग और समय को देखते हुए विभिन्न कार्यों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है । इसके अलावा कई तरह के प्रशिक्षण दिया गया है ताकि महिलाएं घर बैठे ही स्वरोजगार से जुड़ सके हैं और उसका लाभ ले सकें। कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिए जा रहे है।
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