महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि धान खरीदी में अव्यवस्था बढ़ती जा रही है और किसान अब भी टोकन के लिए भटक रहे हैं। टोकन तुंहर हाथ ऐप में सर्वर दिक्कतों के कारण ऑनलाइन टोकन नहीं कट पा रहे, जबकि ऑफलाइन टोकन के लिए किसानों को कई दिनों तक समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन का अनुपात 50-50 किया जाए ताकि किसानों की परेशानी कम हो।
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उन्होंने बताया कि खरीदी देर से शुरू होने और समितियों में खरीदी सीमा तय होने के कारण बहुत कम मात्रा में धान की खरीदी हो पाई है। अधिकांश समितियां प्रतिदिन केवल 1200 से 1700 क्विंटल तक ही खरीद पा रही हैं, जिससे पंजीकृत किसान चिंतित हैं। जिले में पंजीकृत 1,11,831 किसानों से 31 जनवरी तक 12.45 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य है, पर 19 दिन में सिर्फ 23 हजार किसानों से लगभग साढ़े 13 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका है, जो लक्ष्य का मात्र 10 प्रतिशत है।
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उन्होंने कहा कि आगे 22 शासकीय अवकाश होने से सिर्फ 36 दिनों में 88 हजार किसानों से शेष 12.32 लाख मीट्रिक टन धान खरीदना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे हालात में सरकार द्वारा खरीदी सुचारू होने की खबरें वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास हैं।
चंद्राकर ने कहा कि यदि सरकार किसान हितैशी है, तो दैनिक खरीदी सीमा बढ़ाकर एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत सभी किसानों का पूरा धान खरीदा जाए। साथ ही समितियों को धान उठाव में हो रही देरी दूर की जाए, क्योंकि पहले 72 घंटे में उठाव हो जाता था और सोसायटियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आती थी।
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