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भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर निर्धन कन्या का वैदिक विवाह, बना सामाजिक मिसाल

भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर निर्धन कन्या का वैदिक विवाह

महासमुंद। ग्राम सिनोधा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर एक प्रेरक सामाजिक कार्य देखने को मिला।

साहू परिवार एवं ग्रामवासियों के सहयोग से कथा स्थल को विवाह मंडप में परिवर्तित कर ग्राम की निर्धन कन्या सरोज विश्वकर्मा का विवाह ओंकारबंद निवासी तीरथ विश्वकर्मा के साथ विधिवत वैदिक रीति से संपन्न कराया गया।

भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर निर्धन कन्या का वैदिक विवाह

वेद मंत्रोच्चार और मंगल गीतों के बीच हुए इस विवाह में आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों ने नवदंपती को गृहस्थी का आवश्यक सामान भेंट किया, वहीं ग्रामीणों ने वस्त्र, घरेलू सामग्री और आर्थिक सहयोग प्रदान किया।

भागवत कथा सुनने का फायदा तब जब हम उसे अपने जीवन मे उतारे-संत गोवर्धन शरण महाराज

कथावाचक पंडित धनंजय तिवारी ने कहा कि भागवत कथा करुणा, सेवा और मानवता के भाव को समाज में सशक्त करती है। इस आयोजन से ग्राम सिनोधा की एक अलग पहचान बनी है, जिसकी क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।

आयोजकों ने कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग के लिए जिले के समाचार माध्यमों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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