वैश्विक चुनौतियों और भारत की भूमिका को लेकर होने बाले प्रतिष्ठित रायसीना डायलाग के पांचवे संस्करण की मंगलवार से शुरूआत हो गई है। 100 देशों के 700 प्रतिनिधियों के सम्मेलन में बडी बडी हस्तियां शामिल हो रही है, जो दुनियां के सामने खडी चुनौतियों पर अपनी बात रखते नज़र आयेगें।
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प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के पांचवे संस्करण की शुरुआत मंगलवार से राजधानी नई दिल्ली में हो गई। इस डायलॉग का आयोजन विदेश मंत्रालय और ऑर्ब्जवर रिसर्च फाउंडेशन की तरफ से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और सात देशों के पूर्व राष्ट्राध्यक्षों के विचारों को ध्यान से सुना। यह अपनी तरह के सबसे बड़े समागमों में एक है।
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इस तीन दिन के सम्मेलन में 12 देशों के विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रायसीना डॉयलॉग की मुख्यतया तीन विशेषताएं हैं जिनमें विचारों के आदान प्रदान के साथ साथ सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना है।
पहले दिन कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर : भूटान के पूर्व पीएम शेरिंग टोबगे , अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई , डेनमार्क के पूर्व पीएम साउथ कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति समेत सात राष्ट्राध्यक्षों ने संबोधित किया और अपनी बात रखी।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में दुनिया के 30 थिंक टैंक भी अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम के दौरान दुनिया के समक्ष वैश्वीकरण से जुड़ी चुनौतियों, 2030 का एजेंडा, आधुनिक दुनिया में प्रौद्योगिकी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद का मुकाबला जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखेंगे।
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