महासमुंद-महिला बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति व आस्था वुमेन सोशल संस्था महासमुन्द के संयुक्त तत्वाधान में द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जिसमे कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन  निर्मला विनोद, चेतन चन्द्राकर, अध्यक्ष चन्द्रकला द्वारा किया गया

इस अवसर पर निर्मला ने कहा कि पुरुषों की भांति महिलाएं भी देश की नागरिक है और उन्हें भी स्वालंबी होना चाहिए ताकि समय आने पर व्यसाय के माध्यम से अपने परिवार को चलाने में मदद कर सके. चेतन ने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ महिलाओं में व्यवहार ज्ञान भी आवश्यक है जो उनके कौशल में निखार लाता है और उसका अनुभव विपरीत से विपरीत स्थिति में भी अपना जीवन यापन कर सकती हैं. चन्द्रकला  ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक आत्म निर्भर और सछम बनना आज के समय में केवल परिवार के लिए ही नहीं अपितु खुद के लिए भी आवश्यक हैं

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कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में निरंजना चन्द्राकर द्वारा सहकारी समिति की जानकारी देते हुए उसके लाभ व सहायता अनुदान के विषय मे बतलाया समाज सेवी तारिणी चन्द्राकर द्वारा महिलाओं को उधमिता की जानकारी देते हुए कहा कि उधमिता विकास के लिए आवश्यक है कि हम अपने अन्दर उधमी व्यक्ति के गुण बढ़ाये उधमी क्रियाशील होता है उधमी बनना एक व्यक्तिगत कौशल है जिसका संबंध ना जाति, धर्म, समुदाय से रहता है उधमी बनने में स्वयं की भूमिका अहम होती हैं

कार्यक्रम के अंत में नगर के सफल उधमी व लघु व्यसायी महिलाओं को “अपराजिता “प्रशस्त्री पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया कार्यक्रम का संचालन मधु तिवारी व आभार विनोद रंगारी द्वारा किया गया इस अवसर पर शोभा शर्मा, राजश्री ठाकुर,अरुणा तांडी, माधुरी, सरिता,प्रेमलता, ममता तंबोली, सकुन चन्द्राकर, सुधा साहु, ईश्वरी, ज्योति, खुशी,अनिता, सन्नो,भारती दशोदा, चंचल,प्रतिभा लींना मंजू,और बड़ी संख्या में सहकारी समिति और संस्था की महिलाये उपस्थित थी

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