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आत्महत्या रोकथाम के लिए शा. उच्चतर माध्य. विद्यालय खट्टी में दोहराए गए नवजीवन के उद्देश्य, अध्यापकों और विद्यार्थियों ने किया तनाव प्रबंधन का अभ्यास˝

महासमुन्द:ह जरूरी नहीं है कि तनाव संभावित प्रकरण तनाव-कारक की उपस्थिति का पालन नहीं करता है। हमें चाहिए कि मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय तनाव कारकों से मुकाबला करने की कुशलता पर ध्यान दें। यह प्रस्ताव है अभियान नवजीवन का जो तनावग्रस्त व्यक्तियों की मदद के लिए संचालित है। यह उनकी सोच की प्रकृति को समझ कर पहचान के लिए क्षमता प्रदान करने वाला आत्महत्या रोकथाम अभियान है। उद्धरण महासमुंद विकासखंड के ग्राम खट्टी के शा. उच्चतर माध्य. विद्यालय में आयोजित एक ऐसी कार्यशाला का है जिसमें शासकीय विभागों के साथ गैर शासकीय संस्थानों के स्वस्फूर्त प्रेरकों ने भी विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन के गुण सिखलाए.

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसपी वारे के निर्देशानुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक व नवजीवन के जिला नोडल अधिकारी संदीप ताम्रकार के मार्गदर्शन में उड़ान सोसायटी की नवजीवन प्रेरक अनुजा ने बच्चों को 03 बिंदुओं में अभियान नवजीवन से जोड़ते हुए विषम परिस्थितियों में निराशा से उबर कर सकारात्मक सोच अपनाते हुए समय के दुरोपयोग से बचने की सलाह दी। आयोजन के दौरान उपस्थित अतिथियों में टीआई  दीपा केंवट ने बच्चों को असफलताओं से निराश होने की जगह मेहनत और लगन से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान पुलिस बाल मित्र अन्नू भोई ने छात्राओं को आत्म रक्षा के तरीके सिखाए। पुलिस बाद मित्र  रोशना डेविड द्वारा विद्यालय परिसर के प्रांगण में खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन करवाया गया। विजयी रहे प्रतियोगियों को मेडल देकर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं सहित प्राचार्य एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे, जिन्होंने नवजीवन अभियान के तहत स्वयं तनाव प्रबंधन कर तनावग्रस्त लोगों को इससे उबारते हुए नया जीवन देने की शपथ ली।

उल्लेखनीय है कि विश्वसनीय आंकलन के अनुसार भारत में आत्महत्या के प्रकरणों को लेकर प्रदेश चौंथे एवं प्रदेश में जिला महासमुंद अग्रणी स्थान पर है। इन परिस्थतियों को मद्देनजर रखते हुए कलेक्टर  सुनील कुमार जैन ने नवजीवन अभियान के रूप में एक अनुकरणीय पहल शुरू की है। जिसमें शामिल सहयोगियों की मदद से नवजीवन केंद्रों में तनाव प्रबंधन का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही जागरूकता कार्यशालाओं और निशुल्क चिकित्सकीय सुविधाओं की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा हैं। ऐसे में एक ओर जहां, जिला स्तर पर आत्महत्या के आंकड़ों में कमी दर्ज की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर सफल संचलान और क्रियान्वयन प्रणाली को देखते हुए प्रदेश के अन्य जिले भी नवजीवन अपनाने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं.